तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान | Tere Pujan Ko Bhagwan – ram bhajan

ram bhajan

तेरे पूजन को भगवान,
बना मन मंदिर आलीशान ।

किसने जानी तेरी माया,
किसने भेद तुम्हारा पाया ।
हारे ऋषि मुनि कर ध्यान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

तू ही जल में तू ही थल में,
तू ही मन में तू ही वन में ।
तेरा रूप अनूप महान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

तू हर गुल में तू बुलबुल में,
तू हर डाल के हर पातन में ।
तू हर दिन में मूर्तिमान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

तूने राजा रंक बनाए,
तूने भिक्षुक राज बैठाये ।
तेरी लीला अजब महान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

झूठे जग की झूठी माया,
मूरख इसमें क्यों भरमाया ।
कर जीवन का शुभ कल्याण,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

तेरे पूजन को भगवान,
बना मन मंदिर आलीशान ।

किस ने देखि तेरी सूरत,
कौन बनावे तेरी मूरत ।
तू है निराकार भगवान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

पर्वत घाटी नदी समंदर,
तू रमता इन सब के अन्दर ।
तेरे बस में सकल जहान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

तू हैं वन में, तो प्राणन में,
तू तरु तरु के पातन में ।
कोई ना दूजा तेरे सामान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

जल में थल में तू ही समाया,
सब जग तेरा जलवा छाया ।
तू है, घट घट के दरमियान,
बना मन मंदिर आलीशान ॥

सूरज तेरी महिमा गावे,
चंदा तुझ पर बलि बलि जावे ।
इश्वर कर सब का कल्याण,
बना मन मंदिर आलीशान ॥


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